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[संगीत] साहिबा आए घर काहे ना ऐसे तो सताए ना देखूं तुझको चैन आता है साहिबा नींदेंवी आए ना रातें काटी जाए ना तेरा ही ख्याल दिन रहन आता है साहिबा समंदर मेरी आंखों में रह गए हम आते-आते जाना तेरी यादों में रह गए ये पलकें गवाही है हम रातों में रह गए जो वादे किए सारे बस बातों में रह गए बातों बातों में ही ख्वाबों ख्वाबों में ही मेरे करीब है तू तेरी तलब मुझको तेरी तलब जाना हो तू कभी रूबरू ओ

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